मायावती की दहाड़ से सियासी गलियारों में अफरा-तफरी, 11 सितंबर को सहारनपुर में होगी रैली

सहारनपुर। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इलाहाबाद में पीएम मोदी की रैली से तीन गुना ज्यादा भीड़ जुटाकर सियासी समीकरणों को बिगाड़ कर रख दिया है। इस ऐतिहासिक रैली से जहां विरोधी खेमें में तूफान आ गया है वहीं बसपा कार्यकर्ता 11 सितंबर को सहारनपुर में होने वाली महारैली की तैयारियों में जुट गए हैं।  यह कहना गलत नहीं होगा कि इलाहाबाद की मायावती की दहाड़ ने यूपी के सियासी गलियारों में अफरा-तफरी मचा दी है। 

mayavati-saharanpur
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में लगातार उठा-पटक देखने को मिल रही थी। स्वामी प्रसाद मौर्या, आरके चौधरी सहित कई अन्य नेता पार्टी की छवि बिगाड़ने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन बीएसपी में आई इस आंधी से विरोधी पार्टियों के अस्तित्व पर जैसे खतरा मंडराने लगा हो। बीएसपी से कुछ नेताओं को निकाले जाने से विरोधी दलों में उत्साह का माहौल था लेकिन मायावती की रैली में लाखों की संख्या में समर्थकों के जुटने से विरोधी दलों में मायूसी छाने लगी है। 

रविवार को मायावती की इलाहाबाद, वाराणसी व मिर्जापुर मंडल से महारैली में शामिल लाखों लोगों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि पार्टी में बीएसपी का बड़ा चेहरा केवल मायावती हैं। किसी भी नेता के पार्टी छोड़ने से बीएसपी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वहीं इस महारैली में लाखों लोगों की भीड़ को देख कार्यकर्ताओं के हौंसले भी दोगुने हो गए। 

मायावती की महारैली में आई भीड़ ने बीजेपी से लेकर सपा और कांग्रेस के सारे सियासी समीकरण बिगाड़ कर रख दिए। महारैली में दलित, मुस्लिम, पटेल, मौर्या सहित अन्य जाति वर्ग के लाखो लोग शामिल हुए। इस दौरान मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस को जहां दलित व पिछड़ा वर्ग विरोधी तो सपा को गुंडाराज करार दिया। 

मालूम हो कि बीजेपी, कांग्रेस और सपा इलाहाबाद की धरती से ही इलाहाबाद, मिर्जापुर और वाराणसी के पटेल, दलित और मुस्लिम वोटरों पर निशाना साध रहे हैं। इस महारैली से आयी भीड़ ने विरोधी दलों के सारे सियासी समीकरण बिगाड़ कर रख दिए। अब शहर के विभिन्न चौक चैराहों से लेकर सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में इस राजनैतिक समीकरण को लेकर चर्चा जारी है। बीएसपी जिलाध्यक्ष हरीशचंद्र, विधायक दीपक पटेल, सहित अन्य बीएसपी के लोगों ने माना कि मायावती के आने से बीएसपी कार्यकर्ताओं में हौंसला वापस आया है।

स्वामी प्रसाद मौर्या, आरके चौधरी सहित कई अन्य नेताओं नेताओं को बसपा से निकाला जा चुका है। उनके जाने के बाद कई बीएसपी नेता भी पार्टी छोड़ने का विचार बना रहे थे। ऐसे नेता रविवार को मायावती की रैली में शामिल भी हुए। ऐसे नेताओं को लेकर मंच से लगातार हमला बोला जा रहा था। वहीं मायावती की इस रैली में आई भीड़ को देख लोगों को पार्टी छोड़ने से पहले मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। 

अब 11 सितंबर काे बसपा सुप्रीमाे मायावती सहारनपुर पहुंच रही हैं। मिशन 2017 के लिए मायावती यहां से शुरुआत करने जा रही है। मायावती की इस रैली से पहले नसीमुद्दीन सिद्दकी सहारनपुर पहुंचे आैर कार्यक्रम काे सफल बनाने के लिए फिल्डिंग तैयार की। बता दें कि मायावती की रैली सहारनपुर में उसी स्थान पर हाेंगी जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की हुई थी।

 

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