EXCLUSIVE: पीवी सिंधू की जाति खोजते- खोजते परेशान हो गए? लीजिए हाजिर है

नई दिल्ली। रियो ओलिंपिक में पीवी सिंधु ने सिल्वर मेडल जीता। शुक्रवार (19 अगस्त) को खेले गए बैडमिंटन के महिला एकल फाइनल मुकाबले में वह विश्‍व की नंबर एक खिलाड़ी और बैडमिंटन की दुनिया में नडाल गर्ल के नाम से मशहूर कैरोलिना मारिन से हार गईं। हालांकि, सिंधु ने जबर्दस्‍त खेल दिखाया और कैरोलिना को आसान जीत हासिल नहीं होने दी। दोनों के बीच मुकाबला तीन गेम्‍स तक चला। इस हार के बावजूद सिंधु ने फा‍इनल में पहुंचकर रेकॉर्ड बना दिया, क्‍योंकि ओलिंपिक में बैडमिंटन में सिल्‍वर जीतने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी बन चुकी हैं।

P.V.SINDHU इस सबके बीच एक हैरान करने वाली खबर रही। दरअसल जिस वक्त सिंधू स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला कर रही थीं भारत में लोग उनके बारे में जानने को उत्सुक थे। बहुत सारे लोग उनकी जाति जानने के लिए उत्सुक थे। सिर्फ इतना ही नहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग उन्हें अपने क्षेत्र की होने का दावा कर रहे थे। 17 अगस्त के मुकाबले के बाद से ही लोग सिंधू की जाति खोजने लगे थे। वहीं 19 अगस्त के मुकाबले के दिन उन्होंने सिंधू की जाति खोजने में जी जान लगा दी। लोग सिंधू की जाति खोजने में इतने तल्लीन थे कि यह ट्रेंड में आ गया। एक ही समय में करीब दस लाख लोगों ने सिंधू की जाति खोजने की कोशिश की।

लाख कोशिशों के बाद भी लोग पीवी सिंधू की जाति खोजने में विफल रहे। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि भारत में कोई बगैर जाति का हो। आखिर जातिवादी देश में कोई बगैर जाति के कैसे रह सकता है। अगर आप भी खोजने में नाकाम रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं सिंधू की जाति।

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 पीवी सिंधू आंध्र प्रदेश की कापू जाति से आती हैं। कापू का संबंध मुख्यतः दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में पाए जाने वाली उप-जातियों मुन्नुरु कापू, तेलगा, बलीजा, तुर्पू कापू और ओंटारी के एक सामाजिक समुदाय से है। तेलुगु में कपू या कापू शब्द का मतलब किसान या संरक्षक है। कापू लोग तेलुगु बोलते हैं और कापू मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान समुदाय है। इन्हें कुलनाम नायडू से भी सन्दर्भित किया जाता है जिसका अर्थ नेता है।

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कापूनाडू डॉट ओआरजी ने इसका खुलासा किया है। कापू समुदाय के लोग पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जनवरी 2016 में कापू प्रदर्शनकारियों ने चेन्नई-कोलकाता रेलवे नेटवर्क को भी जाम कर दिया था। फरवरी में प्रदर्शनकारी अचानक उग्र हो गए और उन्होंने रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया। वहां खड़ी रत्नांचल एक्सप्रेस पर पहले तो पत्थर बरसाए गए, वहीं बाद में ट्रेन की आठ बोगियों में आग लगा दी थी।

 

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