ब्रजेश पाठक का रहा है अपराधों से नाता

नोएडा। परिवारवादी नेता ब्रजेश पाठक का अपराध से पुराना नाता रहा है। दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में नेशनल दस्तक के एडिटर और कैमरामैन पर 23 अगस्त की शाम हमला कर ब्रजेश पाठक ने अपना आपराधिक चेहरा दिखा दिया है। एडिटर द्वारा ब्रजेश पाठक के खिलाफ दिल्ली के थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

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बता दें कि ब्रजेश पाठक पर साल 1989 और 1997 में अपहरण, जानलेवा हमला और आर्म्स एक्ट सहित कई संगीन मुकदमे दर्ज हुए थे। ब्रजेश पाठक ने बहुजन समाज में विश्वास जताते हुए बसपा को ज्वाइन कर लिया था। बसपा ने पहली बार ब्रजेश पाठक को उन्नाव से लोकसभा का टिकट दिया था। वह बसपा के दम पर लोकसभा पहुंचे थे। ब्रजेश ने तन, मन से बहुजनों के लिए कार्य करने का संकल्प लिया था। जिसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ब्रजेश को फिर से 2014 में लोक सभा में चुनाव लडाया था।

वहीं बसपा ने ब्रजेश पाठक को राज्यसभा के लिए भी नामित किया। जिसके बाद वह बसपा के दम पर राज्यसभा पहुंचे। अब जैसे ही यूपी विधान सभा चुनाव की आहट शुरू हुई तो ब्रजेश पाठक ने अपनी पत्नी और साले को चुनाव लडाने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती से टिकट की डिमांड कर डाली] लेकिन मायावती ने ब्रजेश पाठक की परिवारवादी मानसिकता को समय रहते भांप लिया और 21 अगस्त को ही उसे पार्टी से निकालने का फरमान जारी कर दिया था।

ब्रजेश पाठक पर किडनैपिंग और जानलेवा हमले के दर्ज हुए थे केस

दल बदलू और अपराध के दागी ब्रजेश पाठक भाजपा को कितनी सफेदी दे पाते हैं] यह तो समय ही बताएगा, लेकिन ब्रजेश पाठक का पहले से ही आपराधिक रिकार्ड रहा है। ब्रजेश पर पहला केस लखनउ के हसनगंज थाने में साल 1989 में धारा-364, 147, 148 व 353 के तहत दर्ज हुआ था। दूसरा केस भी इसी थाने में साल 1991 में धारा-147, 427, 336, आम्र्स एक्ट और जानलेवा हमले का दर्ज कराया गया था। इनके अलावा साल 2014 में लोक सभा चुनाव के दौरान मतदाताओं और चुनावकर्मियों को धमकाने का केस उन्नाव के सदर थाने में दर्ज कराया गया था। भाजपा को दागी ब्रजेश पाठक से कितना लाभ या नुकसान होगा यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन ऐसे नेताओं से भाजपा में अपराधी प्रवृत्ति के नेताओं की संख्या बढ गई है।

एसपी मौर्य और ब्रजेश से बिदके साक्षी महाराज

यूपी चुनाव के मद्देनजर भाजपा हर किसी रिजेक्टिड नेता को अपने घर में शरण दे रही है। जिससे पुराने भाजपाई अपने ही घर में घुटन महसूस करने लगे हैं। भाजपा में दल बदलुओं के आने से पुराने भाजपाइयों को यूपी विधान सभा चुनाव में अपनी सीट की बलि देनी पड सकती है। कई नेताअksa ने अंदर खाने दल बदलुओं से नाराजगी भी जतानी शुरू कर दी है। मेरठ में आयोजित भाजपा सम्मेलन में स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर भाजपाई कार्यकर्ता कन्नी काट गए। वहां कुर्सियां भी खाली रह गई थीं। भाजपाइयों ने बताया कि स्वामी प्रसाद मोर्य से भाजपा कार्यकर्ता नाखुश हैं। उधर ब्रजेश पाठक को लेकर साक्षी महाराज भी नाराज हैं। उनका कहना है कि भाजपा में पहले ही मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन, महेश शर्मा जैसे ब्राहमण नेता हैं तो ब्रजेश पाठक की क्या आवश्यकता पडी थी।

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