लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का भाषण सबसे “नीरस व बेजान” था- मायावती

नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 70वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से कल दिए गए भाषण को अत्यंत ही नीरस बताते हुए कहा कि ऐसे प्रेसनोट रुपी भाषणों से देश की तकदीर संवरना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है। मायावती ने आज एक बयान जारी कर कहा कि लाल किले की प्राचीर से दिए जाने वाले तमाम भाषणों में से यह शायद अब तक का सबसे नीरस व बेजान भाषण माना जाएगा। लगभग 11 हजार से अधिक शब्दों वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तकरीर में देश के लोगों में नया जोश, नई उमंग व नई उम्मीद पैदा करने वाला कुछ नहीं है।

माायावती ने आगे कहा, “अपने पूरे भाषण में मेरी सरकार की बजाय, “मैंने- मैंने” पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्यादा बल दिया है। साथ ही अपने अत्यंत ही लंबे भाषण में जिन बातों का उल्लेख बड़े गर्व से किया वे सारी बातें लोग पिछले एक साल से विभिन्न सरकारी प्रेसनोटों व केंद्रीय मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंसों आदि के माध्यम से लगातार सुनते चले आ रहे हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से दिया गया भाषण सरकारी प्रेसनोटों का संकलन मात्र ही कहा जाएगा।” 

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मायावती ने आगे कहा, माननीय प्रदानमंत्री जी ने अपनी जिन तथाकथित उपलब्धियों का उल्लेख अपने भाषण में किया है उसका सही लाभ जमीनी स्तर पर अगर गरीबों, किसानों व विभिन्न पेशों में लगे लोगों को मिल रहा होता तो निश्चय ही इस भाजपा सरकार के प्रति एक अच्छी अवधारणा लोगों में जरुर बनती। लेकिन जमीन पर ठीक इसके उल्टे लोगों की व खासकर व्यापारियों आदि की इस सरकार के प्रति शिकायतें बढ़ी हैं। खासकर देश का छोटा व्यापारी वर्ग आज भाजपा से जितना दु:खी नजर आता है उतना ही दु:खी वह शायद पहले कभी नहीं था।


उन्होने आगे कहा, “इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस-जिस सरकार की तमाम कार्यकलापों का उल्लेख किया है वे ज्यादातर केंद्र सरकार की उपलब्धियों की श्रेणी में नहीं आती हैं। आमतौर पर इस प्रकार के दावे राज्य सरकारें करती हैं।”

मायावती ने आगे कहा साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंकड़ों के मकड़जाल से व विेदेशी संस्थानों की रेटिंग आदि के हवाले से अपनी सरकार की वाहवाही सुनना चाहते हैं, जबकि देश की आमजनता अपने अनुभव के आधार पर ही अपनी धारणा स्वयं बनाती है और इस बारे में आम अवधारणा यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की ज्वलंत समस्याओं जैसे गरीबी व बेरोजगारी उन्मूलन, महंगाई कम करने, आमजनता के जीवन के कष्ट को कम करने व इन सबसे बढ़कर जनहित, जनकल्याण व सामाजिक न्याय के मामले में यह सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में काफी विफल साबित हुई है। कुल मिलाकर इस भाजपा सरकार का अप तक का कार्यकलाप जनविरोधी, गरीब-विरोधी, दलित व अन्य पिछड़ा वर्ग एवं मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज विरोधी तथा किसान विरोधी रहा है, अर्थात यह सरकार केवल बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों को ही समर्पित है। 

उन्होने आगे कहा, इतना ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों से कालाधन लाकर देश के प्रत्येक गरीब परिवार के हर सदस्य को 15 से 20 लाख रुपये देने के अपने ताली बटोरने वाले वायदे को भुला दिया और उसका थोड़ा सा उल्लेख भी अपने भाषणों में नहीं किया। इसी प्रकार गन्ना किसानों का कई सौ करोड़ रुपये के बकाये की अदायगी के संबंध में किसानों को भ्रमित करने वाली बात की। खासकर यूपी के गन्ना किसानों के बारे में केंद्र व राज्य की सपा सरकार के दावे अलग-अलग हैं और इस बारे में वास्तविकता यह है कि गन्ने के बकाया की अदायगी के संबंध में यहां के किसान परेशान व दुखी हैं।

 

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