गुजरात की “दलित अस्मिता यात्रा” दुनियाभर में हई चर्चित

बर्लिन। देशभर और गुजरात के ऊना शहर में दलितों पर हुए अत्याचार के खिलाफ दलितों के पैदल मार्च को अंबेडकरवादियों के साथ-साथ अब दुनियाभर से कई देशों का समर्थन भी मिल रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों समेत प्रवासी भारतीय भी ऊना की क्रूरता के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां विभिन्न अंबेकरवादी और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वयंभू गो रक्षकों द्वारा हिंसा के खिलाफ प्रदर्शनों का मंचन किया।

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जर्मनी के गोटिंगेन यूनिवर्सिटी से भी ऊना में दलितों पर हुई क्रूर व अमानवीय घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। जर्मनी में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गजेंद्रन अय्याथुराई कर रहे हैं। उनका बताया कि भारत में दलितों के खिलाफ अमानवीय हिंसा के खिलाफ छात्रों व शोधार्थी छात्रों के द्वारा एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। 

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अय्याथुराई का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन भारत के उन लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने लिए आयोजित किया गया है जो राजनीति हिंसा का सामना कर रहे हैं। दलितों ने गुजरात में चार दलितों युवकों की पिटाई पर प्रतिक्रिया में एक व्यापक जन आंदोलन शुरु कर दिया है।   

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जर्मनी की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होने गुजरात के ऊना में दलितों का प्रदर्शन शक्ल ले रहा है और प्रदर्शनकारी सरकार से कह रहे हैं कि यदि गाय तुम्हारी मां है तो आप ही इसका अंतिम संस्कार करें। दलितों ने मृत गायों को उठाने से इनकार कर दिया है। उनका यह भाषण सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया है। 

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