दीपा कर्मकार के ”कर्माकर” और फिर कर्मकार बनने की कहानी

नई दिल्ली। रियो ओलंपिक फाइनल में पहुंचने के बाद जिम्नास्ट दीपा कर्मकार चारों तरफ सुर्खियों में हैं। दीपा ने अपनी कामयाबी से हर अखबार और टीवी चैनल पर जगह पाई है। ओबीसी समुदाय से आने वाली इस बहुजन बेटी को चारों तरफ से सराहना मिल रही है। लेकिन दीपा की इस कामयाबी के बाद उनके सरनेम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हिंदी मीडिया उन्हें कर्मकार के बजाय कर्माकर लिख रहा है। इस पर बहुत सारे लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि बाद में मीडिया को उनका सरनेम करेक्ट करना पड़ा। 
दीपा के सरनेम को लेकर वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र यादव ने सबसे पहले सवाल उठाया। उनकी पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो गई। जिसके बाद अब दीपा कर्मकार को कर्माकर लिखना बंद कर दिया गया…। 

deepa-karnakar

महेंद्र यादव ने लिखा था…

बहुत शानदार दीपा कर्मकार। ओलंपिक में जिम्नास्टिक्स में फाइनल में जगह बनाकर आपने साबित कर दिया कि आप वाकई कर्मकार हैं, करमाकर नहीं। बांग्ला में आपका नाम দীপা কর্মকার ही लिखा जाता है, जो बांग्ला न जानने वाला भी आसानी से पढ़ और समझ सकता है। आप अर्जुन नहीं, एकलव्य की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं, और किसी असत्य या सत्य साईं की भक्त भी नहीं हैं।

जाने-अनजाने अंग्रेजी स्पेलिंग के कारण आपको कर्माकर लिखा जा रहा है ताकि आपके नाम से महाराष्ट्रीय चितपावन ब्राह्मण की झलक मिले। मिलता-जुलता सरनेम करमरकर महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों में होता ही है जिसे अक्सर लोग कर्माकर ही लिख देते हैं।

कर्मकार बंगाल और त्रिपुरा की जाति होती है जिसका परंपरागत पेशा लोहे के औजार बनाने का रहा है। उत्तर भारत की विश्वकर्मा जाति से भी इसे समझा जा सकता है।
ऐसे मेहनतकश और हुनरमंद समाज से निकलकर दीपा पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट बनी हैं जिन्होंने 1965 के बाद से पहली बार फाइनल में जगह बनाई है। दीपा 2014 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में और 2015 के हिरोशिमा एशियाड में कांस्यपदक जीत चुकी हैं। इस बार ओलंपिक गोल्ड मेडल की बारी है।
শুভ কামনা. দীপা কর্মকার

दीपा के सरनेम को लेकर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने लिखा है…

शुक्रिया बीबीसी, नवभारत टाइम्स, एनडीटीवी, प्रभात खबर, नई दुनिया….. आप दीपा कर्मकार को अब उसके सही नाम का हक दे रहे हैं.
शुक्रिया Mahendra Yadav आपके इस अभियान के लिए. आपकी मुहिम के बाद कई जगह सुधार दिख रहा है.
करमाकर नहीं
कर्मकार!
दीपा कर्मकार.
त्रिपुरा के बंगाली परिवार में जन्मी भारत की बेटी दीपा कर्मकार.

महेंद्र यादव ने दीपा को जन्मदिन की बधाइयां देते हुए लिखा था…

करमाकर या करमरकर चिता की “पावन” अग्नि से पैदा होने वाले चितपावन ब्राह्मण होते हैं, और कर्मकार लोहा पिघला देने वाली भट्टी की आग से पैदा होते हैं। इतना-सा फर्क समझना कोई मुश्किल तो नहीं।
Happy Birthday দীপা কর্মকার (9 अगस्त)

 

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