गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में एडमिशन में ओबीसी छात्रों से भेदभाव

गांधीनगर। गुजरात सेंट्रल यूनिवर्सिटी की एम फिल, पीएचडी प्रवेश परीक्षा में ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले पर यूनिवर्सिटी की छात्रा कल्याणी प्रधान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कल्याणी की पीटिशन पर हाईकोर्ट ने एडमिशन प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया है।

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क्या है मामला?

हाईकोर्ट में पीटिशन दाखिल करने वाली छात्रा कल्याणी बताती हैं कि दरअसल एल.फिल./ पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय के प्रॉसपेक्टस में लिखित और इंटरव्यू का प्रावधान किया गया था। लेकिन छात्रों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर न करके सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर किया गया। उन्होंने सवाल किया कि लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दोनो 100 -100 अंक के किए गए थे, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि कोर्ट का आदेश था कि 70 फीसदी लिखित और 30 फीसदी इंटरव्यू के अंक दिए जाने चाहिए।

इंटरव्यू के आधार पर हुआ सेलेक्शन

कल्याणी नेशनल दस्तक से बातचीत करते हुए बताती हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित परीक्षा करवाई लेकिन उसके नंबर नहीं जोड़े बल्कि सिर्फ इंटरव्यू के नंबर के आधार पर ही सेलेक्शन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले पर ओबीसी छात्रों को भी सामान्य श्रेणी के साथ की मेरिट में रखा गया। दरअसल लिखित परीक्षा का परिणाम आने के बाद सामान्य और ओबीसी छात्रों को 45-45 प्रतिशत और एससी/एसटी को 35 फीसदी अंक हासिल करने वाले छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। आपको बता दें कि यहा ओबीसी और सामान्य श्रेणी के छात्रों को बराबरी के साथ ट्रीट किया गया जो कि असंवैधानिक है। सामान्य और ओबीसी छात्रों के बीच 10 फीसदी मेरिट का अंतर रहता है। कल्याणी बताती हैं कि अगर सामान्य वर्ग के छात्रों का 50 फीसदी और ओबीसी के छात्रों का 40 फीसदी कट ऑफ निकलता तो कुछ और ओबीसी छात्रों को इंटरव्यू में बैठने का मौका मिलता।  

सिर्फ दो प्रश्न पूछे गए

कल्याणी बताती हैं कि उनसे इंटरव्यू में सिर्फ दो प्रश्न पूछे गए, जिसका जवाब भी उन्होंने दिया। इसके बाद इंटरव्यू पैनल ने थैंक्स बोलकर जाने के लिए बोल दिया। कल्याणी ने बताया कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि दो सवाल के लिए 100 नंबर कैसे तय किए गए। उन्होंने सवाल किया है कि देशभर के कॉलेजों में ओबीसी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है।  

 

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