दलितों को भाजपा और पीएम मोदी की सहानुभूति की जरूरत नहीं है- मायावती

नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो व यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने गुजरात के ऊना में दलितों की बर्बर के लगभग एक महीने बाद पीएम मोदी के दिए भावुक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरे तौर पर शरारतपूर्ण व राजनीति से प्रेरित बयान है। पीएम बात-बात पर सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए भावुक ना बनें बल्कि देश व राज्यों में कानून का राज सख्ती से स्थापित कर लोगों को इंसाफ देना सुनिश्चित करें। मायावती ने आगे कहा यह कोई एहसान नहीं बल्कि यह उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है। गौरतलब है पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान बयान देते हुए कहा था कि “मारना है तो मुझे मारो, दलितों को नहीं।”

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शरारतपूर्ण व राजनीति से प्रेरित बयान

मायावती ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तो देश की ज्वलंत समस्याओं पर कभी बोलते नहीं हैं। जिस कारण मामला काफी बिगड़ता जाता है। जब काफी देर से कुछ बोलते हैं तो ऐसा बोलते हैं कि उससे समस्या सुलझने के बजाय और ज्यादा उलझ कर मुश्किल हो जाता है। इसी क्रम में उनका कल हैदराबाद में दिया गया बयान कि मेरे दलित भाईयों को मारना बंद करो। यदि मारना ही है तो मुझे मारो पूरे तौर से शरारतपूर्ण व राजनीति से प्रेरित बयान है। इस प्रकार के बयान से अखबारों की सुर्खियां तो बटोरी जा सकती है, परंतु उससे समस्या का असली समाधान संभव नहीं होता है।”

कानून का राज हो

उन्होंने कहा कि देशभर में दलितों पर जातिवादी जुल्म-ज्यादती, अत्याचार, शोषण व गोरक्षा के नाम पर जो अमानवीय व्यवहार व आतंक की घटनाएं घट रही हैं उन मामलों में दलितों को भाजपा सरकार व खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहानुभूति की जरुरत नहीं है। बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्ती से कानूनी कार्रवाई करने व कराने की जरुरत है। बसपा दलितों के उत्पीड़न के मामले में खासकर देश में कानून का राज चाहती है। देश के दलितों व गरीबों को मानवीय अधिकार दिए जाने की जरुरत है। उन्हें उप पर होने वाले अत्याचारों पर सहानुभूति से ज्यादा कानूनी संरक्षण व इंसाफ दिए जाने की जरुरत है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिम्मेदारी है कि वे राज्यों को इस संबंध में पत्र लिखकर सख्त निर्देश जारी करें, परंतु ऐसा होता हुआ बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है।

घड़ियाली आंसू न बहाएं, करें ठोस कार्रवाई


बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा,  इतना ही नहीं बल्कि दलितों पर अत्याचार व शोषण होता रहा और प्रधानमंत्री खामोशी से सब कुछ देखते रहे। जबकि देश में सर्वसमाज के लोग इन मामलों पर काफी उद्धेलित हुए। प्रधानमंत्री जी अगर आज से 2 वर्ष पहले इन अत्याचारों के खिलाफ बोलते व दोषियों को सजा सुनिश्चित करवाते तो आज हालात इतने नहीं बिगड़ते कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसी बयानबाजी करनी पड़ती। वास्तव में उत्तर प्रदेश के साथ कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा आमचुनाव के मद्देनजर दलितों का वोट हासिल करने के स्वार्थ में ही मजबूर होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कल यह बयान देना पड़ा है। जो कि लोगों को ड्रामेबाजी व पूरी तरह से घड़ियाली आंसू ही लगते हैं। उन्हें चाहिए कि इन गंभीर मामलों में केवल खानापूर्ति करने के बजाय ठोस कार्रवाई करना सुनिश्चित कराये। 

ऊना कांड के पीछे असली गोरक्षक या नकली?


मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में नकली गोरक्षकों व असली गोरक्षकों का भी बहस छेड़ा है तो उन्हें देश की आमजनता को बताना चाहिए कि गुजरात के ऊना दलित बर्बर कांड के पीछे गोरक्षक असली थे या नकली। उस घटना का मुख्यदोषी व षड़यंत्रकारी को अभी तक क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया है। 

गलत सोच का परिणाम है अत्याचार


बसपा प्रमुख ने कहा कि इसी गोरक्षा के नाम पर गोरक्षकों द्वारा मुस्लिम समाज के लोगों की हत्या कर दी जाती है। उनकी महिलाओं के खिलाफ सरेआम बर्बर व्यवहार किया जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिंतामुक्त होकर खामोश रहना पसंद करते हैं। इसी गलत सोच का परिणाम है कि अब मुसलमानों के बाद दलितों को देश भर में गोरक्षा के नाम पर अत्याचार व आतंक का शिकार बनाया जा रहा है। इस संबंध में माननीय प्रधानमंत्री जी बताएं कि इसे कौन रोकेगा? इस प्रकार के ज्वलंत समस्याओं के मामले में केवल बयानबाजी करने से काम नहीं चलने वाला है बल्कि इसके लिए ठोस व सख्त कानूनी कार्रवाई करने की जरुरत है। 

 

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