ऊना कांड: दलितों को विज्ञापन से लुभा रही बीजेपी

नई दिल्ली। ऊना में दलितों की हुई बर्बर पिटाई के बाद अब सरकार उस पर विज्ञापन के सहारे उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश कर रही है। देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन से को देखते हुए सरकार अब उनका गुस्सा शांत कराने की हर संभव कोशिश करती हुई नजर आ रही है। इसी कड़ी में अब मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट ने टीवी और सोशल मीडिया के सहारे कुछ विज्ञापन जारी किए हैं। 

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टीवी पर आने वाले एक विज्ञापन में एक बच्चा अपनी मां की गलती को ठीक करता हूआ दिखाया गया है। इस विज्ञापन में उसकी मां कूड़ा उठाने वालों को कूड़ा वाला कहती है, तो बच्चा तभी कहता है कि अंकल साफ सफाई करने वाले हैं उनको सफाई वाला कहना चाहिए। यह विज्ञापन इस संदेश के साथ सामप्त होता है कि हमें म्यूनिसिपैलिटी के सफाई कर्मियों और सफाई का काम करने वाले दूसरे लोगों को राखी बांधनी चाहिए। बता दें कि यह ऐड स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा है और इससे सरकार के दो मकसद पूरे होंगे। यह प्रचार अभियान दो हफ्ते पहले शुरू हुआ था। 

मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट के स्पोक्सपर्सन ने कहा कि यह सफाई कर्मचारियों के काम की अहमियत और उनके योगदान को सही से सबके सामने पेश करने वाली थीम आधारित प्रचार अभियान का हिस्सा है। इसका मकसद जनता को यह बताना है कि वह उन लोगों को अभियान का पार्टनर मानें। मिनिस्ट्री के फेसबुक पेज और ट्विटर टाइमलाइन में बहुत सारी पंच लाइन है जिनकी सहायता से सफाई कर्मचारियों के प्रति लोगों में अच्छी भावनाएं जगाने की कोशिश की जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि स्वच्छ भारत अभियान के एक ऐसे ही नारे में लिखा है कि म्यूनिसिपैलिटी वर्कर्स बीमारियों को हमसे दूर रखते हैं। उनके प्रयासों की सरहाना करने के लिए शेयर करें। आपको बता दें कि इस पेज पर गलभग तीन हजार फॉलोअर्स हैं।  

तो वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी की फोटो वाले एक स्लोग में लिखा है कि रोज सुबह उठने पर आपको धरती के इन देवदूतों की वजह से सड़के और आसपास का इलाका साफ मिलता है। इसके अलावा दूसरे स्लोगन में लिखा है कि सफाई कर्मचारी उस दलित समुदाय के हैं, जिसने अपने ऊपर हिंसा के खिलाफ हाल में गुजरात और देश के दूसरे इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया था। प्रताप सुथन बैंग इन द मिडल के मैनेजिंग पार्टनर और ऐड वेटरन के हिसाब से ऐसा नहीं है कि टीवी विज्ञापन दलितों के विरोध प्रदर्शन की प्रतिक्रिया में नहीं शुरू किए गए हैं बल्कि यह सही कदम है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम सभी पेशे के लोगों को इज्जत देना शुरू करें। हमें इंडिया में मेहनत को सम्मान देना शुरू करना होगा। गांधीजी के समय से ही हम इसके बारे में बात करते रहे हैं लेकिन यह काम अब तक नहीं कर पाए हैं।

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