मीडिया की मदद से दलितों के खिलाफ बीजेपी की बड़ी साजिश का खुलासा

नई दिल्ली। गुजरात में दलितों की बेदर्दी से पिटाई होती है। मीडिया में कोई खबर नहीं है। सोशल मीडिया पर अपर कास्ट गायब हैं। बहुजन समाज उसे अपने दम पर देश विदेश में लोगों तक पहुंचाता है। फिर संसद में बीएसपी सुप्रीमो मायावती हुंकार भरती है। गुजरात के दलित ऐतिहासिक हिम्मत दिखाते हुए ऐतिहासिक तरीके से मरी गाय दफ्तर में फेंककर विरोध जताते हैं। फिर नेताओं का डैमेज कंट्रोल शूरू होता है। गृहमंत्री, राहुल गांधी समेत तमाम नेता दौरा शुरू कर देते हैं। लेकिन मीडिया की चुप्पी बनी रहती है। फिर एकाएक बीजेपी का एक छुटभैया नेता मायावती पर अभद्र टिप्पणी करता है। मीडिया उसे तानकर चलाती है। पूरे देश में खबर फैलती है। लगातार खबरें चलती रहती हैं। गुजरात दलित अत्याचार का मामला दब सा जाता है। फिर मीडिया को एक और हथियार हाथ आता है। बीएसपी मायावती पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर प्रदर्शन करती है। आरोप लगता है कि आरोपी नेता के परिवारवालों के खिलाफ अभद्र भाषा बोली गई। बस फिर क्या था अपर कास्ट गैंग सक्रिय हो जाता है। मीडिया मायावती पर अभद्र टिप्पणी से हटकर बीजेपी नेता के परिवार की खबर को तान देता है। अब वह इसे ताने रहेगा। क्योंकि उसे बहुजनों के खिलाफ जातिवादी हथियार मिल जाता है। इसके दो फायदे हैं। एक बड़ा फायदा है कि दलित अत्याचार का मुद्दा दब गया। दूसरा बीजेपी के आरोपी नेता को बचाने का मौका मिल गया। इस चाल को मीडिया के जानकार बीजेपी की बड़ी साजिश बता रहे हैं। देखिए बहुजन आवाज सोशल साइट्स पर।

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दिलीप सी मंडल, पूर्व संपादक, इंडिया टुडे और पीएचडी स्कॉलर

गुजरात में दलितों के साथ आतंकवाद की भयानक घटना 11 जुलाई को होती है…. और भारत का एक भी अखबार 20 जुलाई तक इस पर संपादकीय नहीं लिखता. ज्यादातर जगह पहली बार यह खबर 21 जुलाई को पहली बार नजर आती है. संसद में हंगामे के बाद लेकिन दयाशंकर के परिवार को किसी कार्यकर्ता द्वारा दी गई “गाली” पर उसी मीडिया की तेजी देखिए. आधे घंटे में सारे चैनल लाइव दिखाने लगे. आज रात सब जगह डिस्कशन होगा. यह आपका मीडिया है ही नहीं.  जिनका मीडिया, उनकी बात. जामनगर, गुजरात की तस्वीर.

संपादकों, एंकरों,

आप बहुत धूर्त और शातिर हैं. लेकिन आपकी मुश्किल यह है कि एक सामान्य भारतीय नागरिक भी आपकी ब्राह्मणवादी चाल को समझने लगा है.

सोनू सिंह पासी ने 18 घंटे पहले ही लिख दिया था कि आप दयाशंकर को आगे करके गुजरात के शानदार दलित प्रतिरोध की खबर को दबाने की कोशिश करोगे.

सुनील कुमार सुमन, प्रोफेसर, वर्धा यूनिवर्सिटी

कायदे से दयाशंकर सिंह की पत्नी को पहले अपने पति के खिलाफ एफ़.आई.आर. दर्ज़ कराना चाहिए था। बलात्कारी और लंपट आख़िर कहाँ से पैदा होते हैं ? उन्हें बचाने और पोषित करने में उनके अपने लोग भी तो शामिल होते हैं। जब खुद के अपमान का बोध हुआ तो इसका मतलब समझ में आया। यही सब तो सदियों से दलित स्त्रियाँ सुनती-भुगतती आई हैं। सवर्ण स्त्रियों ने कभी अपने पुरुषों को यह सब घिनौने कुकर्म करने से रोका ?

बहरहाल हम जैसे को तैसा में भरोसा नहीं रखते। लोकतांत्रिक मूल्यों को मानते हैं। बसपा के जिन भी लोगों ने अगर किसी महिला का अपमान किया है तो उसकी निंदा होनी चाहिए। यह स्त्री विरोधी ब्राह्मणवादी मानसिकता है, जिसको ख़त्म करना जरूरी है…

नदीम एस अख्तर, प्रोफेसर, आईआईएमसी

मीडिया ने बड़ी चतुराई से मायावती के बरक्स दयाशंकर की पत्नी और बेटी को खड़ा कर दिया। यही तो खेल है।

अब बताइये दयाशंकर जैसे यूपीे बीजेपी के भूतपूर्व उपाध्यक्ष के बयान और बीएसपी कार्यकर्ताओं की भीड़ के नारों की तुलना की जा रही है। अब इन मूर्खों को कौन समझाए कि भीड़ का कोई चाल-चरित्र और चेहरा नहीं होता, नेता का होता है।

News Room diversity का नाम तो सुना होगा आपने? अगर नहीं सुना हो तो ये बता दूं कि पत्रकारिता संस्थानों में इसकी पढाई media ethics चैप्टर में करवाई जाती है। News Room diversity का मतलब है कि बराहमन और अगड़ी जातियों समेत दलित को भी न्यूज़ बनाने और हेडलाइन तय करने का अधिकार मिलना। मतलब कि जब News Room diversity नहीं है तो फिर खबर भी भाई लोग अपने मतलब वाली ही बनाएंगे ना!!!

पूजा सिंह

दयाशंकर अपशब्द कह के सिमट गए तो क्या हुआ उनकी पत्नी हैं ना उनका दूसरा हथियार, तो क्या अब माया V/S दयाशंकर की wife स्वाति सिंह होगा।

शीतल पी सिंह

समय का चक्का पीछे नहीं जाता

मेंढक टर्राने लगे ! मानसून की सूचना देते मेंढक !

दयाशंकर सिंह के बयान पर बिना पूँछ की पूँछ पिछली टांगों के बीच छिपाये बड़ी जात के धूर्त उसकी पत्नी की ओढ़नी लेकर मैदान में हैं !

करुणा मर्यादा स्त्रीत्व मानवीयता आचार सौंस्कार सब मीडिया सोशल मीडिया पर शब्दों की बाज़ीगरी के साथ सवाल के तौर पर पेश हैं !

जो मायावती को कहा गया / कहा जाता रहा है (देश के सबसे बड़े हिन्दी अख़बार ने छाप दिया था कि उनके एक अवैध बच्ची है )/ कहा जा रहा है/ कहा जायेगा , की वजह पर बात करने , उसे बदलने , उसे ख़त्म करने की हर बात फिर वहीं पहुँचा दी जायेगी जहाँ वह हजारों बरस से मौजूद है !

स्वाति सिंह और उनकी बच्ची विक्टिम हैं । बेवजह विक्टिम हैं पर वे कभी भी उतनी बड़ी विक्टिम नहीं हो सकतीं जो मायावती जन्मना हैं !

पर अब सारी कलमें सारे दिमाग़ सारे औज़ार यकसां हो जायेंगे , तहरीर बदल लेंगे !

पर तीर तो निकल गया !

यह तो तय है कि अख़बार चाहे जो छापें , टी वी चाहे जो दिखाये , सोशल मीडिया चाहे जिसे ट्रेंड कराये रंगमंच पर “बहन जी” तूफ़ान की तरह हाज़िर हैं !

अब यू पी में जो भी लड़ेगा ……उन्हीं से लड़ेगा २०१७ में,दयाशंकर की कृपा से…

दिव्यांशु पटेल

लफंगे दयाशंकर की बीवी बोल रही है और मीडिया झूम झूम के दिखा रहा है ,

मगर कोई ये नहीं पूछ रहा पति देवता की भक्त पत्नी जी से की नसीमुद्दीन समेत बसपा के नेताओं ने जो कहा उसका वीडियो सबूत कहाँ है ? हाँ आपके पति ने जो बोला वो सबके पास है ,फिर भी आप कल शाम तक एकदम चुप थी !

बसपा के नेताओं ने दया की बीवी और बेटी को वैसे ही गाली दी है जैसे जेनयू में कन्हैया कुमार ने देश विरोधी नारे लगाये थे, न कन्हैया का वीडियो आज तक संघी गिरोह पेश कर पाया ,न ये पति के लिए बिलखती भक्तिन पेश कर पाएंगी !

फिर भी आप लोग मान लीजिये कि नसीमुद्दीन जी ने ऐसा कहा ,और मायावती जी ने दया का सर काटने की बात कही क्योंकि ऐसा उसकी बीवी और बेटी बोल रहे हैं और मीडिया दिखा रहा है !

कोई सबूत नहीं ,कोई गवाह नहीं ,बस बोल दिया तो मान लो !

अगर आपको बेशर्मी का क्लासिक भारतीय नमूना देखना हो तो कल से भारतीय मीडिया और तमाम विश्लेषकों को देख लीजिये !

अभी कुछ देर पहले “अखिल भारतीय आहत सवर्ण संघ” कीभावना के तहत बहनजी को अपनीजातीय कुंठा से संबोंधित करने वाले भगोड़े दयाशंकर सिंह की बीवी स्वाति सिंह ने बहनजी पर एफआईआर करवा दी है!

इसे कहते हैं मनुवादी सोच का सबसे जबरदस्त उदाहरण, स्वाति सिंह और उसके तमाम जातिवादी लोगों का मुंह कल शाम तक नहीं खुला , यूपी में आइपीएस अमिताभ ठाकुर जैसे जातिवादी अधिकारी जो इस मामले में फेसबुक पर खुलकर दयाशंकर द्वारा कही गयी बात को सही बोलरहे हैं , उन्हें कोईकुछ नहीं कहेगा, कोईआहत नहीं होगा !

मैंने तो कल ही लिख दिया था कि गिद्ध मंडरा रहे हैं और शाम तक पूरे दलित पिछड़ा समाज को बदनाम करने की मुहीम शुरू हो जाएगी , वही हो रहाहै अब !

इससे साफ़ पता चलता है कि आप किसी दलित महिला को कुछ भीबोलिए , कुछ भी करिए , मगर इसके प्रतिक्रिया में अगर वो अपनी आवाज उठा देते हैं तो फिर “अखिल भारतीय आहत सवर्ण संघ” सक्रिय हो जाता है और राय शुमारी का माहौल ऐसा बनाया जाता है कि पीड़ित ही अपराधी महसूस करने लगे!

शर्म करो स्वाति सिंह , तुम जैसी औरतों के नाते ही आजतक ब्राह्मणवादी गुलामी कीबेड़ियों में औरतें जकड़ी हुई हैं , तुम्हे बहन मायावती से कोई मतलब नहीं , तुमसिर्फ और सिर्फ जातिवाद के आधार पर पूरे दलित पिछड़ा समाज को बुरा भला बोल रही हो , मगर तुम्हारे कंधे पे बन्दूक रख कर अपनी जातीय कुंठा जाहिर कर रहे तमाम जातिवादी अधिकारी और नेता ये नहीं जानते कि लोकतंत्र में फोटोशोप और झूठ के सहारे नहीं बल्कि वोट की ताकत ज्यादा महत्त्व रखती है और वो ताकत दलित पिछड़ा समाज कुछ महीने बाद दिखा देगा !

 

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