केंद्र में आपकी सरकार है दयाशंकर जी, थोड़ी “बोल-बचन” की ट्रेनिंग लीजिए

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार के दौरान ”बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार” का नारा दिया करते थे लेकिन गुरुवार उन्ही की पार्टी (बीजेपी) के यूपी उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। जिसके बाद देशभर के अनेक हिस्सों में लाखों की संख्या में बहुजन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यही नहीं सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, ट्विटर आदि पर भी इस अपमानजन टिप्पणी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं पढ़ने को मिल रही हैं।

आइए पढ़िए सोशल मीडिया यूजर्स ने किस प्रकार आलोचना की है।

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कृष्ण कांत ने अपनी फेसबुक पर लिखा, ‘जब पार्टी के बड़े नेता मंच और माइक पर मायावती जैसी ताकतवर स्त्री को गरिया सकते हैं तो सोशल मीडिया पर भक्तों की गाली दूध भात है। यही है इनका विराट संस्कार।’

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मंडल ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ”मोदी जी, आपके मंत्रिपरिषद के वी. के. सिंह दलितों को कुत्ता बोलकर भी अपने पद पर बने रहते हैं। दयाशंकरों का हौसला यूं ही नहीं बढ़ता।

शाखा में सुबह सुबह और क्या सीखते हैं ये लंपट।”

श्यामसुंदर बी.मौर्या लिखते हैं, ‘मोदी के बीजेपी उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने मायावती को गरियाया। इसमें हैरत की क्या बात है जब इस पार्टी में भक्तों से लेकर शीर्ष नेता तक एक जैसे हैं, बस सफेदपोश बने हुए हैं। बाकी दंगे करवाते समय ये क्या-क्या नहीं करवा चुके हैं अपने लड़ाको से गुजरात से लेकर मुजफ्फरनगर तक।’

अली खान ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘‎बीजेपी नेता के बिगड़े बोल, आज गंदी मानसिकता को दुनिया ने देख लिया

“‪‎औरतो का सम्मान न ‎दिल मे न ‪‎ज़ुबान मे “

और बात करते है दलित सम्मान की महिला सम्मान की…?’

स्वप्निल कुमार ने लिखा, ”यूपी भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने BSP सुप्रीमो मायावती पर जिस तरह के अपशब्द प्रयोग किया है वह निहायत ही घटिया और ओछी है। राजनीति में विचारधारा अलग होने और विरोध करने का ये कत्तई मतलब नहीं कि भाषा की मर्यादा को ताक पर रख दिया जाये । निहायत ही निंदनीय ….”

जयशंकर गुप्ता लिखते हैं, ”इस दयाशंकर नामक असभ्य, गंवार और जाहिल जंतु पर दलित महिला, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के विरुद्ध असभ्य ए्वं गैरकानूनी टिप्पणी करने के लिए हरिजन ऐक्ट के तहत मुकदमा दायर कर उसे तत्काल जेल में डालना चाहिए। चाल चरित्र और चेहरे के मामले में औरों से अलग होने का दावा करनेवाले संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह गंभीर चिंतन और आत्मविश्लेषण का समय है कि उसकी सांस्कृतिक पाठशालाओं से किस तरह के जंतु बाहर आ रहे हैं और किस तरह की भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं। दयाशंकर जैसे लोगों को केवल पद से हटाना पर्याप्त नहीं है। सबक तो ऐसा हो कि भविष्य में कोई भी नेता, स्वामी, कथित साध्वी, योगी या कोई और किसी दलित, महिला अथवा किसी और के बारे में भी इस तरह की जाहिल भाषा के इस्तेमाल की जुर्रत नहीं कर सकें। लेकिन तड़ीपार लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर महिमा मंडित करनेवालों से आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं। वैसे भी अभी तक इस तरह की असभ्य और अमर्यादित टिप्पणियाँ करनेवालों को सबक देने का एक भी हालिया प्रमाण देखने को नहीं मिलता। कहीं यह सब सुविचारित तो नहीं!”

प्रतीक्षा पांडे ने लिखा, ”दयाशंकर जी, खासी उम्र है आपकी। केंद्र में रूलिंग पार्टी के हैं आप। थोड़ी बोल-बचन की ट्रेनिंग लीजिए। आपकी मंत्री जी तो ‘डियर’ कहने पर ही नाराज़ हो जाती हैं।

अजय प्रकाश लिखते हैं, ”भाजपा में दंगाइयों की कमी थी जो अब बेशर्मों की भर्ती होने लगी।”

जोगिंदर रावत ने लिखा, ”मायावती जी दलित समाज से आती है और महिला है, पूरे देश में आज शोर है, अभद्रता किसी के लिए ठीक नहीं है, कोंग्रेस सांसद शशि थरूर जी की स्वर्गीय पत्नी सुनन्दा थरूर जी को 50 करोड़ की गर्ल फ़्रेंड (महिला मित्र ) सामूहिक मंच से उत्तर प्रदेश में मोदी जी ने सम्बोधित किया और 72 लोकसभा सीटें जीती । उस समय किसी भी समाज, राजनीतिक सामाजिक पार्टी, मीडिया से सायद ही कोई बयान इसके विरोध में आया हो । ये हमारा सिलेक्टिव संस्कारी होने का प्रतीक है । महिलाओं का सार्वजनिक और व्यक्तिगत या किसी भी रूप से अपमान घृणित कृत्य है राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक परिवेश और पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता है।”

राहुल सांस्कृत्यायन ने लिखा, ”बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार। जय हो!”

 

 

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