रोहितों के बोलने से डरते हैं समाज के जातिवादी ठेकेदार- कन्हैया कुमार

नई दिल्ली। ओबीसी यूनाइटेड फोरम के बैनर तले दिल्ली में रविवार को ओबीसी-एससी-एसटी छात्रों का जनसैलाब उमड़ा। देशभर के सेंट्रल यूनिवर्सिटी, स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्र आरक्षण के खिलाफ हो रही साजिश बंद करने और उसे पूरी तरह लागू करने की मांग करते हुए जमकर केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमला किया। इसके साथ ही रोहित वेमुला को इंसाफ के लिए भी मार्च निकाला गया। इस मामले में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने ब्राह्मणवाद और केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है….

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”आज 17 जुलाई को रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के छह महीने बाद देश भर में न जाने कितने रोहितों की आवाज़ गूँज रही है। रोहित के विचार हमारे बीच आज भी जिन्दा हैं और हमेशा रहेंगे। विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, गरीबों आदि के लिए यातनाघर बनाने वाले लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि कब वे इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिए गए।

वे रोहित से डरते क्यों हैं? इसलिए कि रोहित जैसे लोग जब आजीवन आर्थिक अभाव और सामाजिक अपमान का सामना करके उच्च शिक्षा तक पहुँचते हैं तो समाज की उन सड़ी-गली मान्यताओं पर सवाल उठाते हैं जिनकी बुनियाद पर जातिवादियों और ब्राह्मणवादियों ने अपना साम्राज्य खड़ा किया है। इसलिए कि उनमें रोहित जैसे लोगों से आँखें मिलाकर बात करने की हिम्मत नहीं होती, क्योंकि उनके पास रोहित के सवालों के तार्किक जवाब नहीं होते।

समाज के जातिवादी ठेकेदार रोहितों को उच्च शिक्षा संस्थानों में देखकर नफ़रत और असुरक्षा से भर उठते हैं। यही नफ़रत कभी महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के आदिवासी प्रोफ़ेसर सुनील कुमार सुमन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाइयों के रूप में सामने आती है तो कभी पटना आर्ट कॉलेज के दलित साथियों की गिरफ़्तारी के रूप में। वे रोहित से इसलिए भी चिढ़ते हैं कि रोहित ने बोलने की आज़ादी के लिए बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने की हिम्मत दिखाई थी।

रोहित की सांस्थानिक हत्या में शामिल लोगों को जेल भिजवाने के लिए हम बार-बार सड़कों पर निकलेंगे। जिन्हें जेल में होना चाहिए, वे लंबे समय तक वीसी, मंत्री जैसे पदों पर नहीं बने रहेंगे। हम किसी और एकलव्य का अँगूठा नहीं कटने देंगे, हम किसी और रोहित को नहीं मरने देंगे। लड़ेंगे, जीतेंगे।
लड़ो पढ़ाई करने को, पढ़ो समाज बदलने को।

 

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